Canada Vich Punjabi | Harmohan Singh Yadav saved many Sikhs during 1984 Sikh Genocide | Must Share


On October 31, 1984, Indira Gandhi, then India’s prime minister, was assassinated by two of her Sikh bodyguards, Satwant Singh and Beant Singh, in apparent retaliation for the Indian army’s action in June that year to flush out an armed separatist group led by Jarnail Singh Bhindranwale from the Golden Temple, the holiest place of worship for the world’s Sikhs.

The military’s operation, code-named Blue Star, claimed up to 700 lives, according to some estimates.

1984 में इंदिरा गाँधी की मौत के बाद इंदिरा गाँधी की मौत के बाद दिल्ली एवं अन्य शहरों में सिखों का समूहिक कत्लयाम हुआ । 1984 में सिक्ख कत्लयाम के दौरान हरमोहन सिंह यादव ने असंख्य सिक्खों की जान की रक्षा की थी।कत्लयाम कानपूर में एक बहुत बड़ी दंगाइयों की भीड़ निर्दोष सिक्खों को मारने पर आमादा थी, ऐसे में सिक्खों ने जान बचाने के लिए यादव साहब की हवेली में शरण ली। यादव साहब ने अपने दोनों पुत्रों के साथ मिलकर दंगाइयों का जम कर मुकाबला किया और अपने हथियारों से भयंकर गोलीबारी करते हुए उन्होंने दंगाइयों को मार भगाया और सिक्खों की रक्षा की थी । भारत सरकार ने उनको इस असाधारण बहादुरी और सुकर्म के लिए “शौर्य-चक्र” से भी नवाज़ा था।

दंगाइयों ने सैकड़ों सिखों को मौत के घाट उतार दिया | दंगाई रतनलाल नगर में धावा बोल दिया | 50 से ज्यादा महिला व पुरुषों को दंगाइयों ने घेर लिया | किसी तरह से सभी सिख समुदाय के लोग छोटे चौधरी के घर जा पहुंचे | चौधरी ने सबको घर के अंदर किया | दंगाइयों को यह बात जब पता चली तो वह चौधरी के घर की तरफ बढ़े | चौधरी ने बंदूक उठाई और आपने सामने दंगाइयों से मोर्चा लेने लगे | चौधरी लगातार पांच घंटे तक बीच सड़क पर खड़े होकर फायर करते रहे | दंगाइयों को चौधरी की गोली लगने लगी तो वह पीछे हट गए | दंगाई रतनलाल नगर से भाग खड़े हुए और चौधरी की चलते सिखों की जान बची | चौधरी के इस साहसिक काम से प्रभावित होकर 1991 में राष्ट्रपति आर वैंकटरमन ने उन्हें शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया |

Following Gandhi’s assassination, attacks on Sikhs erupted across several Indian cities, including Delhi, Kolkata, Bokaro and Kanpur. At least 2,733 Sikhs were killed in the Indian capital Delhi alone in the carnage.

Nearly three decades later, as victims continue their battle for justice, the Indian government’s Special Investigation Team (SIT) has decided to reopen and examine 75 closed cases related to the riots in Delhi.

In the latest development, a Delhi court has set October 25 as the deadline for CBI, India’s top investigative body, for providing information on the status of investigation in a case involving the killing of three people n a Sikh gurudwara, the day after the assassination.


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Post Author: Gurjinder Cheema

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